जानिए पर्यावरण के प्रति समर्पित उन लोगों के बारे में जिनसे मिलती है सीख – Know about those people devoted to the environment, from whom they learn

0
47

पर्यावरण दिवस के अवसर पर जानें उन लोगों के बारे में जो पर्यावरण के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं. इनमें से एक पौधों को बेटी मानकर उनका दान करते हैं, तो दूसरी धरती पर हरियाली फ़ैलाने के अपने पापा के सपने को साकार करने की कोशिश में लगी हुई हैं.

World Environment Day –कई बार ऐसे लोग देखने को मिलते हैं जो कन्यादान कर देने के बाद बेटी की ओर पलटकर देखते तक नहीं हैं. भले ही उनकी बेटी किसी भी हाल में क्यों न हो. तो ऐसे लोग भी कम नहीं हैं जो किसी के सपने का कोई मोल नहीं समझते हैं. लेकिन आज हम पर्यावरण दिवस  के अवसर पर आपको दो ऐसे पर्यावरणविद के बारे में बताएंगे, जो पर्यावरण के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं. एक पौधों को बेटी मानकर उनका दान करते हैं और उनके जीवन के लिए बेहतर परिवार की तलाश करते हैं. तो दूसरी धरती पर लाखों पेड़ लगाने के अपने पिता के देखे सपने को पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश में लगी हुई हैं. आइये जानते हैं इनके बारे में.

पौधों को बेटी मानकर कन्यादान करते हैं पेड़ वाले बाबा

पेड़ वाले बाबा… ये नाम नहीं पहचान है. एक ऐसे व्यक्ति की, जो देश में ग्यारह लाख पौधे लगाने का संकल्प लेने के बाद अब तक लगभग सात लाख पौधे लगा भी चुके हैं और इस संकल्प के पूरा होने के बाद इससे भी बड़ा संकल्प लेने का मन बनाये हुए हैं. इनका नाम है आचार्य चंद्रभूषण तिवारी. हालांकि इनको इस नाम से कम ही लोग जानते हैं.

चंद्रभूषण पौधों को अपनी बेटी का दर्जा देते हैं. उनका कहना है कि जिस तरह लोग अपनी बेटी के लिए अच्छे घर की तलाश करते हैं तब कन्यादान करते हैं. उसी तरह मैं पौधे दान करने से पहले उस व्यक्ति या संस्था के बारे में सब कुछ पता करके उसको समधी मानकर ही पौधे दान करता हूं.

जिससे ये पुख्ता हो जाता है कि मेरी बेटी वहां ससम्मान जीवित रहेगी और उसका खाद-पानी और उसकी देखरेख बेहतर तरह से हो सकेगी. मैं जिनको पौधे दान करता हूँ उनसे ये भी कहता हूँ कि अगर मेरी बेटी का पालन-पोषण दो-तीन साल तक अच्छी तरह से कर दोगे तो ये तुम्हारी पीढ़ियों को पालेगी. जब ख़त्म हो जाएगी तो चौखट-दरवाजा बनकर तुम्हारे घर की रक्षा करेगी. मेरी बेटी मरघट तक साथ निभाएगी. इसको अपना लीजिये और मुझे समधी बना लीजिये.

वो कहते हैं, मैं अपनी बेटी को ऐसे ही नहीं छोड़ देता हूँ. बल्कि पौधे लगाने के बाद मैं उनके बारे में जानकारी लेता रहता हूँ और उनको देखने भी जाता हूँ, कि वो अपना जीवन कैसे जी रहे हैं. वो सुरक्षित हैं या नहीं और उनकी देखरेख किस तरह से की जा रही है.

52 वर्षीय चंद्रभूषण कहते हैं कि पौधरोपण और पौधे दान करने की शुरुआत मैंने वर्ष 2006 में की थी. पेड़ों की कटान से दुखी होकर मैंने हरी-हरा व्रत कथा पुस्तक भी लिखी है और मैं इसे सत्यनारायण व्रत कथा की तरह लोगों के सामने सुनाता हूँ और पेड़ों के महत्त्व को समझाता हूँ. प्रकृति के प्रति उनकी आस्था को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व राजयपाल बी.एल.

जोशी एवं कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों के द्वारा आचार्य चंद्रभूषण को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है. यही नहीं चंद्रभूषण गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का काम भी करते हैं. सामाजिक कार्यों में रुचि होने की वजह से उन्होंने केंद्रीय विद्यालय की नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया था.

हरियाली फ़ैलाने के अपने पापा के सपने को साकार कर रही हैं स्वाति हरियाली

देश के अलग-अलग शहरों में लाखों पेड़ लगाकर देश भर में हरियाली फ़ैलाने का संकल्प लिया है स्वाति हरियाली ने. स्वाति अपने पापा के सपने को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं. वो भोजन भंडारा की तरह ही वृक्ष भंडारा करके पौधों का वितरण करती हैं. आने वाले दिनों में वो बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग शहरों में वृक्षारोपण करना चाहती हैं.

स्वाति कहती हैं पापा का सपना था देश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करके हरियाली फैलाना. मेरे पापा इस सपने को पूरा करने में तन-मन से लगे हुए थे और उन्होंने वृक्ष भंडारे के तहत लाखों पौधों को दान किया है और वृक्षारोपण किया है. लेकिन दुर्भाग्य से पिछले वर्ष नवंबर में कोरोना ने मेरे पापा को मुझसे छीन लिया. उसके बाद मैंने अपने पापा के हरियाली फैलाने के सपने को पूरा करने का संकल्प लिया है.

इस संकल्प में मेरे दो छोटे भाई-बहन भी मेरा साथ दे रहे हैं. वो बताती हैं मेरे पापा ने वर्ष 1992 में हरियाली फ़ैलाने का संकल्प लिया था तब से वो इस काम में लगे हुए थे. उनको उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा और कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा इस काम के लिए सम्मानित किया गया था. अब उनके जाने के बाद मैं अपने पापा के अधूरे काम को पूरा करने में जुट गयी हूँ.

एच.आर. इन मार्केटिंग में एमबीए कर चुकीं 26 वर्षीय स्वाति बाकी युवाओं की तरह लाइफ को इंजॉय करने की जगह अपना ज्यादातर समय पेड़-पौधों से सम्बंधित किताबों और तरह-तरह के राइटअप पढ़ने में देती हैं जिससे उनको इस सम्बन्ध में ज्यादा से ज्यादा नॉलिज हो सके और वो हरियाली फ़ैलाने के अपने पापा के सपने को पूरा कर सकें.