मूत्राशय कैंसर लक्षण और कारण के अनेक उपाय

Many remedies for symptoms and causes of bladder cancer/WorldCreativities

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मूत्राशय कैंसर इन दिनों काफी गंभीर समस्या बनकर उभरी है। इसके मरीज़ भारत समेत पूरी दुनिया में बढ़ते जा रहे हैं।
यदि केवल भारत की बात की जाए तो भारत में हर साल प्रति 1000 लोगों में 2.5% लोगों में मूत्राशय कैंसर के मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें से अधिकांश लोगों की मौत इस बीमारी से हो जाती है।
ये आंकड़े वाकई चौंकाने वाले हैं, जो किसी भी व्यक्ति को चिंता में डाल सकते हैं।
इसी कारण, कैंसर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के हाथ-पैर ठंडे पड़ जाते हैं क्योंकि उनकी नज़र में यह मौत का दूसरा नाम है।
उनका यही रवैया उन्हें मूत्राशय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शिकार बना सकता है, लेकिन यदि उन्हें इसकी पूरी जानकारी हो तो वे इसका इलाज सही तरीके से करा सकते हैं।

यदि आप भी मूत्राशय कैंसर से जुड़ी आवश्यक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए।

मूत्राशय कैंसर क्या है? (what is bladder cancer? in Hindi)

मूत्राशय कैंसर को ब्लैडर कार्सिनोमा के नाम से भी जाना जाता है, जिसका तात्पर्य मूत्राशय में कोशिकाओं के असामान्य विकास से है।
इस कैंसर की शुरूआत पेट दर्द से होती है, जिसकी वजह से लोग इसकी गंभीरता को समझ नहीं पाते हैं, लेकिन कुछ समय के बाद यह गंभीर रूप ले लेता है और इससे पीड़ित लोगों को असहनीय दर्द महसूस होता है।

मूत्राशय कैंसर के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of bladder cancer in hindi)

हो सकता है कि कुछ लोगो को मूत्राशय कैंसर की शुरूआत का पता न चले जिसकी वजह से उन्हें काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बावजूद, ब्लैडर कैंसर पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि मूत्राशय कैंसर के संभावित लक्षण ये 5 हो सकते हैं-

  • पेशाब में खून आना- मूत्राशय कैंसर का प्रमुख लक्षण पेशाब में खून आना है।
    ऐसी स्थिति में लोगों को मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है ताकि इस समस्या को समय रहते ठीक किया जा सके
  • पेशाब करने में दर्द होना- यदि किसी व्यक्ति को पेशाब करने में दर्द होता है, तो उसे इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए बल्कि इसकी जांच तुरंत करानी चाहिए।
  • पैल्विक दर्द होना- मूत्राशय कैंसर का अन्य लक्षण पैल्विक दर्द होना है।
    यह समस्या मुख्य रूप से महिलाओं में देखने को मिलती है, जिन्हें मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
  • कमर दर्द होना- कमर दर्द आम समस्या समझा जाता है, जिसे लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं।
    लेकिन, कई बार यह मूत्राशय कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए लोगों बिना डॉक्टर की सलाह के किसी नतीजे पर नहीं पहुँचना चाहिए।
  • बार-बार पेशाब आना- अक्सर, बार-बार पेशाब आने को किडनी, शुगर इत्यादि बीमारी का संकेत समझा जाता है।
    लेकिन, कई बार यह मूत्राशय कैंसर का संकेत भी हो सकता है, जिसकी जांच करानी पड़ सकती है।

मूत्राशय कैंसर के कारण क्या हैं? (Bladder cancer causes in hindi)

किसी भी व्यक्ति को मूत्राशय कैंसर हो सकता है, जिसके कारण काफी सारे हो सकते हैं।
इसके अलावा, मूत्राशय कैंसर के निम्नलिखित कारण हैं-

  • धूम्रपान करना- मूत्राशय कैंसर होने की संभावना ऐसे लोगों में अधिक रहती है, जो धूम्रपान अधिक मात्रा में करते हैं।
    ऐसे लोगों को धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उन्हें अन्य जानलेवा बीमारी न हो।
  • तंबाकू का सेवन करना- यदि कोई व्यक्ति तंबाकू का सेवन अधिक मात्रा में करता है, तो उसे मूत्राशय कैंसर होने की संभावना काफी अधिक रहती है।
  • केमिकल के संपर्क में रहना- मूत्राशय कैंसर उस स्थिति में भी हो सकता है, जब लोग केमिकल के संपर्क में अधिक रहते हैं।
    ऐसे लोगों को काम करते समय सुरक्षात्मक उपकरणों (safety equipment) का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि उनकी सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े।
  • उम्रदराज़ होना- मूत्राशय कैंसर का अधिकतर मामले उम्रदराज़ लोगों (50 या उससे अधिक) में देखने को मिलते हैं।
    इसी कारण, ब्लैडर कैंसर होने का अन्य कारण उम्रदराज़ होना भी हो सकता है।
  • जेनेटिक कारण होना- अक्सर, मूत्राशय कैंसर ऐसे शख्स को भी हो सकता है, जिनके परिवार में अन्य सदस्य इस कैंसर से पीड़ित हो।
    इस प्रकार, मूत्राशय कैंसर जेनेटिक कारण से भी हो सकता है।

मूत्राशय कैंसर के स्तर कितने हैं? (Stages of bladder cancer in hindi)

मूत्राशय कैंसर काफी सारी शुरूआत काफी धीरे होती है, जो कुछ समय के बाद शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाता है।
इसी आधार पर मूत्राशय कैंसर के स्तर का निर्धारण किया जाता है, जो मुख्य रूप से 3 तरह के होते हैं-

  • ब्लैडर वॉल में ट्यूमर का बनना- मूत्राशय कैंसर का पहला स्तर ब्लैडर वॉल में ट्यूमर का बनना है।
    इस स्थिति में व्यक्ति को मूत्राशय कैंसर के लक्षण नज़र नहीं आते हैं, जिसकी वजह से उन्हें इस बात का पता नहीं चलता है कि वे मूत्राशय कैंसर से पीड़ित हो चुके हैं।
  • कैंसर का लिम्फ नोड तक पहुँचना- मूत्राशय कैंसर दूसरे स्तर में लिम्फ नोड तक पहुंच जाता है।
    इस स्थिति में इससे पीड़ित लोगों को शुरूआती लक्षण नज़र आने लगते हैं, जिसकी वजह से उन्हें दर्द का सामना करना पड़ता है।
  • कैंसर का शरीर के अन्य अंगों तक फैलना- मूत्राशय कैंसर के तीसरे व अंतिम स्तर में यह शरीर के अन्य अंगों जैसे फेफड़े, गुर्दे, इत्यादि में फैल जाता है।
    इस स्थिति में व्यक्ति का मूत्राशय पूरी तरह से खराब हो जाता है, जिसके लिए उसे इलाज की जरूरत पड़ती है।

मूत्राशय कैंसर की पहचान कैसे करें? (How to diagnose bladder cancer? In hindi)

हालांकि, मूत्राशय कैंसर से हर साल काफी सारे लोगों की मौत होती है, लेकिन यदि इसकी पहचान समय रहते कर ली जाए तो इस आंकड़ों को कम किया जा सकता है।
इस प्रकार, मूत्राशय कैंसर की पहचान कई तरीके से किया जा सकता है, जो निम्नलिखित हैं-

  • सी.टी. स्कैन कराना- मूत्राशय कैंसर का पता लगाने का आसान तरीका सी.टी.स्कैन कराना है।
    इस टेस्ट के द्वारा शरीर की अंदरूनी तस्वीर ली जाती है और इसका पता लगाया जाता है कि यह कैंसर शरीर में किस हद तक फैल चुका है।
  • एक्स-रे कराना- मूत्राशय कैंसर कई बार एक्स-रे के द्वारा भी किया जाता है।
    एक्स-रे में मूत्राशय की तस्वीर ली जाती है और यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि मूत्राशय मार्ग में क्या दिक्कत है।
  • यूरिन कॉयटोलॉजी कराना- अक्सर, डॉक्टर यूरिन कॉयटोलॉजी (urine cytology) से भी मूत्राशय कैंसर की पहचान की जाती है।
    इसमें यूरिन के नमूने की जांच माइक्रोस्कोप में रखकर की जाती है और इस बात का पता लगाया जाता है कि क्या किसी व्यक्ति के यूरिन में कैंसर की कीटाणु मौजूद हैं अथवा नहीं।
  • बायोप्सी कराना- मूत्राशय कैंसर की पहचान बायोप्सी से भी की जाती है।
    बायोप्सी में मूत्राशय के कोशिकाओं के नमूने को लेकर उसकी जांच की जाती है।
  • कायस्टोस्कोपी कराना- वर्तमान समय में, मूत्राशय कैंसर की पहचान कायस्टोस्कोपी (cystoscope) के द्वारा भी की जाती है।
    कायस्टोस्कोपी को मुख्य रूप से महिला पर किया जाता है, जिसमें डॉक्टर उनके मूत्रमार्ग में छोटी सी नली को डालकर कैंसर की कोशिकाओं की जांच करते हैं।

मूत्राशय कैंसर का इलाज कैसे किया जा सकता है? (bladder cancer treatment in hindi)

आमतौर पर, मूत्राशय कैंसर समेत सभी कैंसर को लाइलाज बीमारी समझा जाता है, जिसके कारण लोग इससे निजात नहीं पा पाते हैं।
लेकिन, यदि उन्हें यह जानकारी हो किसी भी अन्य बीमारी की तरह मूत्राशय कैंसर का भी इलाज करा सकते हैं, तो शायद उनकी ज़िदगी बेहतर होती।
अत: यदि कोई व्यक्ति मूत्राशय कैंसर से पीड़ित है, तो वह इसका इलाज इन 4 तरीके से करा सकता है-

  • टीकाकरण करना- मूत्राशय कैंसर का इलाज करने का सबसे आसान तरीका टीकाकरण करना है।
    यह टीकाकरण ब्लैडर कैंसर को शरीर के अन्य अंगों में फैलने से रोकने के साथ-साथ उसे ठीक करने में भी सहायता करता है।
  • कीमोथेरेपी कराना- मूत्राशय कैंसर का इलाज कीमोथेरेपी के द्वारा भी किया जाता है।
    कीमोथेरेपी में कैंसर पीड़ित लोगों को विशेष तरह की दवाई दी जाती है, जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करती है।
  • रेडिएशन थेरेपी कराना- अक्सर, मूत्राशय कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी भी कारगर साबित हो सकता है।
    रेडिएशन थेरेपी में कैंसर कोशिकाओं का नष्ट करने के लिए रेडिएशन किरणों का इस्तेमाल किया जाता है और इस कैंसर से पीड़ित लोगों को राहत दी जाती है।
  • कैस्टेक्टॉमी सर्जरी कराना- जब ब्लैडर कैंसर से पीड़ित लोगों को किसी भी अन्य तरीके से आराम नहीं मिलता है, तब डॉक्टर उसे कैस्टेक्टॉमी सर्जरी (cystecomy surgery) कराने की सलाह देते हैं।
    कैस्टेक्टॉमी सर्जरी में मुख्य रूप से मूत्राशय को हटाकर उसकी जगह पर नया मूत्राशय लगाया जाता है क्योंकि पिछला मूत्राशय पूरी तरह से खराब हो चुका होता है। 

कैस्टेक्टॉमी सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? (Precautions after Cystectomy in hindi)

चूंकि, मूत्राशय कैंसर का इलाज करने का बेहतरीन तरीका कैस्टेक्टॉमी सर्जरी है इसलिए इसके बाद का समय काफी संवेदनशील होता है।
इसी कारण, मूत्राशय हटाने वाली सर्जरी कराने के बाद लोगों को निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि वे जल्दी ठीक हो सकें-

  • आराम करना- कैस्टेक्टॉमी सर्जरी के बाद आराम करना काफी जरूरी होता है।
    आराम करने से इसे कराने वाले लोगों के शरीर को एनर्जी मिलती है, जो उन्हें जल्दी से ठीक होने में मदद करती है।
  • दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करना- मूत्राशय हटाने के ऑपरेशन के बाद सर्जरी वाली जगह पर दर्द होना स्वाभाविक चीज़ है।
    इस दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर इस ऑपरेशन को कराने वाले लोगों को कुछ दवाईयां देते हैं।
  • भारी चीज़ों को न उठाना- यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में कैस्टेक्टॉमी सर्जरी कराई है, तो उसे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    उस व्यक्ति को भारी चीज़ों को उठाने से बचना चाहिए ताकि उसकी सेहत पर बुरा असर न पड़े।
  • सर्जरी वाली जगह को पानी से बचाना- मूत्राशय कैंसर की सर्जरी के बाद सर्जरी वाला हिस्सा काफी नाज़ुक होता है।
    उस हिस्से में कुछ घाव भी हो सकते हैं, इसलिए इसे कराने वाले लोगों को सर्जरी वाले हिस्से को पानी से बचाना चाहिए ताकि वह घाव गंभीर रूप न ले।
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना- कैस्टेक्टॉमी सर्जरी कराने वाले सभी लोगों को इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि वे तब तक डॉक्टर के संपर्क में रहे जब तक वे उन्हें पूरी तरह से सेहतमंद घोषित न कर दें।
    इसके अलावा, मूत्राशय कैंसर का इलाज कराने वाले किसी व्यक्ति को स्वास्थ संबंधी कोई समस्या महसूस होती है, तो उसे बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए और उसकी सूचना डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि उसे समय रहते ठीक किया जा सके।

पहले के ज़माने में कैंसर का इलाज उपलब्ध नहीं था, जिसकी वजह से काफी सारे लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती है।
लेकिन, अभी समय काफी बदल चुका है, मेडिकल साइंस ने काफी विकास कर लिया है। अभी बड़ी-से-बड़ी बीमारियों का इलाज संभव है।
इनमें मूत्राशय कैंसर भी शामिल हैं, जिसे काफी सारे तरीके से ठीक किया जा सकता है।
इसके बावजूद, यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण  चीज़ है कि लोगों में मूत्राशय कैंसर के प्रति जागरूकता की कमी है, जिसकी वजह से वे इससे छुटकारा नहीं पा पाते हैं।इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि आपके लिए इस लेख को पढ़ना उपयोगी साबित हुआ होगा क्योंकि इसमें हमने मूत्राशय कैंसर की जानकारी दी गई है।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q1. मूत्राशय कैंसर के शुरूआती लक्षण क्या हैं?
Ans- ज्यादातर मामलों में, मूत्राशय कैंसर के शुरूआती लक्षणों में पेशाब में खून आना होता है।
इसके अलावा, यदि लोगों को पेशाब के रंग में बदलाव नज़र आता है, तो उन्हें इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि यह मूत्राशय कैंसर का लक्षण हो सकता है।

Q2. मूत्राशय कैंसर के 3 प्रकार कौन-से हैं?
Ans- मूत्राशय कैंसर के 3 प्रकारों में यूरोथेलियल कार्सिनोमा (Urothelial carcinoma),स्क्वैमस  सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma) और एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) के नाम शामिल हैं।

Q3. मूत्राशय कैंसर का प्रमुख कारण क्या है?
Ans- मूत्राशय कैंसर के किसी एक कारण का पता लगाना काफी मुश्किल है क्योंकि यह बीमारी काफी सारे कारणों से मिलकर होती है।
इनमें नशीले पदार्थों का सेवन करना, केमिकल के संपर्क में रहना, जेनेटिक कारण होना इत्यादि शामिल हैं।

Q4. मूत्राशय कैंसर से पीड़ित व्यक्ति कितने समय तक जीवित रह सकता है?
Ans- मूत्राशय कैंसर पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि मूत्राशय कैंसर का पता लगने के बाद इससे पीड़ित अगले 5 सालों तक जीवित रह सकता है।

Q5. क्या कीमोथेरेपी से मूत्राशय कैंसर का इलाज किया जा सकता है?

Ans- हालांकि, कीमोथेरेपी मूत्राशय कैंसर को पूरी तरह से ठीक करने में कामयाब नहीं होता है, लेकिन यह इस कैंसर को बढ़ने से रोकने में सहायक साबित होता है। कीमोथेरेपी का इस्तेमाल मुख्य रूप से मूत्राशय कैंसर के शुरूआती स्तर में किया जाता है क्योंकि उस समय तक यह कैंसर ज्यादा फैलता नहीं है, जिससे उसे रोकना आसान बन जाता है।

Q6. मूत्राशय कैंसर होने की संभावना किन लोगों में अधिक रहती है?

Ans- मूत्राशय कैंसर किसी भी व्यक्ति (पुरूष और महिला दोनों) को हो सकता है। इसके अलावा, यह कैंसर ऐसे लोगों को भी हो सकता है, जो केमिकल के संपर्क में रहकर अपना काम करते हैं उदाहरण के लिए- कंपनी में काम करने वाले लोग शामिल हैं।

Q7. मूत्राशय कैंसर में किस तरह का भोजन से परहेज़ करना चाहिए?

Ans- मूत्राशय कैंसर से पीड़ित लोगों को अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में उन्हें लाल माँस, तेल, मसालेदार भोजन, तरल पदार्थ इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उनकी सेहत का खराब कर सकता है।

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