बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल


Places to visit in Badrinath | Badrinath Attractions – http://www.worldcreativities.com

बद्रीनाथ मंदिर भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। केदारनाथ से बद्रीनाथ की दूरी 40 किलोमीटर है ये प्राचीन मन्दिर हिन्दुओ के धार्मिक स्थल में से एक है।

बद्रीनाथ के दर्शन अप्रेल से नवम्बर के बिच होते है, बद्रीनाथ मंदिर  अलकनंदा नदी के किनारे बना हुआ है। ये हिन्दुओ का ऐतिहासिक मंदिर है।बद्रीनाथ मंदिर में भगवान् विष्णु को समर्पित है।

ये मंदिर हिन्दुओ के धार्मिक चार धाम तीर्थ  स्थलों में से एक है। लोक कथाओ के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 7 वीं – 9 वीं सदी हुआ था। बद्रीनाथ मंदिर के आस पास बने मंदिरों को भी बद्रीनाथ मंदिर के नाम से ही जाना जाता है। हिमालय के क्षेत्र बहुत ही मनोभावक है।

यहाँ सालभर देश विदेश से  आते है। सर्दियों के मौसम में हिमालय की शीतल जलवायु के कारण मंदिर छ; महीनो तक बंद रहता है। क्योकि इस ऋतू में हिमालय पर बर्फ की सफ़ेद चादर फैली हुई रहती है।

सडको पर बर्फ जमने के वजह से रास्ते बंद हो जाते है। जिससे वाहनों को रास्ता पार करने में दिक्कत आती है। इसलिये अप्रेल महीने के अंत में इसकी यात्रा शुरू होती है। और नवम्बर महीने प्रारंभ में समय सीमा तक इसके द्वार यात्रा के खुलते है।

बद्रीनाथ का इतिहास-History of badrinath

बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल।Places to visit in Badrinath , कुदरती आपदा और हिमस्खलनों की वजह से मंदिर कई बार क्षतिग्रस्त हुआ है । इस कारणबद्रीनाथ मंदिर का काफी बार पुननिर्माण किया गया ।

बद्रीनाथ मंदिर स्थापना के बारे में कुछ इतिहासको के अनुसार ये मंदिर आडवी शताब्दी से है। इस मंदिर को संकराचार्ये ने स्थापना की थी, एक मान्यता है की संकराचार्य सन 814 से 820 के मध्य यहाँ रहे थे। संकराचार्य इस अवधि में 6 महीने बद्रीनाथ,

और बाकि समय केदारनाथ में बिताये थे । हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार बद्रीनाथ की पर्तिमा देवताओ ने स्थापित की थी । बद्रीनाथ हिन्दू धार्मिक तीर्थ स्थल है, जो हिमालय की गोद में बसा है ।

बद्रीनाथ मदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है । हिन्दू धर्म में चार धाम की यात्रा में बद्रीनाथ का खास महत्त्व है । ये पवित्र जगह भगवान विष्णु को समर्पित है। बद्रीनाथ समुद्र टत से 3133मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है। बद्रीनाथ की केदारनाथ की दुरी 40 किलोमीटर है।

बद्रीनाथ धाम की कथाएँ-Stories of Badrinath Dham

प्राचीन लोककथाओ में बद्रीनाथ धाम का वर्णन इस प्रकार किया गया है। बद्रीनाथ धाम की धार्मिक रूप से बहुत मनोरम गाथा बताई जाती है। क्योकि बद्रीनाथ और इसके आस पास फैला हुआ क्षेत्र बहुत ही मनोभावक था।

ये क्षेत्र उस समय शिव भूमि अर्थाथ केदारखंड भूभाग से जानी जाती थी। गंगा मया जब भगवान् शिव की सर से बहती हुई धरती पर आई तो गंगा मया 12 धाराओ में विभाजित होकर धरती के अलग अलग हिस्सों में प्रवाहित हुई।

बद्रीनाथ धाम से होकर गंगा की जो धारा प्रवाहित होती है उसे अलकनंदा नाम से पुरे विश्व में जाना जाता है। इस स्थान के संदर्भ में ऐसा भी कहा जाता है।

बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल ।

बद्रीनाथ के दर्शनीय स्थल ।Places to visit in Badrinath,देवयुग में भगवान् विष्णु अपने ध्यानयोग करने के लिए उचित जगह की तलाश में थे। तो भगवान् विष्णु की नज़र बद्रीनाथ क्षेत्र पर स्थित अलकनंदा की भूमि पर पड़ी।

ये स्थान भगवान् विष्णु को बहुत रास आया। उन्हें ध्यानयोग के लिए ये स्थान बहुत पसंद आया। तो भगवान् विष्णु ने भगवान् शिव के नीलकंठ पर्वत के पास गये, और एक नन्हे बालक का रूप धारण किया।और वे बालक के समान रोने लगे। नन्हे बालक के रोने की आवाज सुनकर माता पार्वती का मन विचलित हो उठा। माता पार्वती उस बालक के पास गई।

उस बालक को चुप कराकर और उसके रुद्रन की वजह पूछने लगी। तो बालक रूप धारण किये भगवान् विष्णु ने माता पार्वती से वही मनोरम और सुन्दर स्थान माँगा जो उन्हें अतिप्रिय था। और फिर ये स्थान आज पुरे विश्व में बद्रीविशाल व् बद्रीनाथ के नाम से प्रसिद है।

बद्रीनाथ मंदिर की दूसरी कथा -Stories of Badrinath Dham

हिदुओ के धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस स्थान से जुडी एक अन्य गाथा भी है। जिसका वर्णन विष्णु पुराण में किया गया है। विष्णु पुराण में बताया गया है की धर्म के दो पुत्र हुए थे। जिनमे से एक का नाम नर तथा दुसरे का नाम नारायण था।

धर्म के इन दोनों बेटो ने धर्म के प्रति लोगो में आस्था और विश्वास पैदा करने हेतु धर्म के विकास और विस्तार के लिए प्रयास किया। धर्म के दोनों पुत्रो ने एक साल तक इसी स्थल पर कठोर तपस्या की थी।

और उन दोनों को एक आश्रम स्थापित करने के लिए एक पवित्र स्थल की जरूरत थी। इसलिए वे वृद्ध बद्री, योग बद्री, ध्यान बद्री और भविष्य बद्री इन स्थानों उचित स्थान खोजने को गये। तो उनकी नज़रे अलकनंदा नदी के पीछे वाले स्थान पर पड़ी।

वहा उन्हें एक गर्म और एक शीतल जल स्त्रोत मिला। उन्होंने इस स्थान को अपने आश्रम के लिए चुना। और इस स्थान का नाम धर्म पुत्रो ने बद्रीविशाल रखा। लोगो का ऐसा भी मानना है कि महाभारत के रचियता व्यास जी ने भी इसी स्थान पर बैठकर महाभारत लिखी थी।

और लोगो में ये धारणा भी प्रचलित है। जिसके अनुसार अगले जन्म में नर और नारायण ने अर्जुन और श्रीकृष्ण के अवतार में इसी स्थान पर जन्म लिया था। महाभारत से जुडी अन्य कथा ये भी है कि पांडवो द्वारा अपने प्रितरो का पिंडदान भी इसी जगह किया गया।

इसके बाद से वर्तमान समय भी लोग अपने प्रितरो की मुक्ति के लिए बद्रीनाथ के ब्रम्हाकपाल स्थान पर पिंडदान करवाने आते है।

बद्रीनाथ के पर्यटक स्थल-Tourist Places of Badrinath

बद्रीनाथ में घुमने योग्य और अन्य पर्यटक स्थल भी है। जिनमे पांडुकेश्वर सबसे शानदार स्थान है। भारत के धार्मिक ग्रंथो के अनुसार इस स्थान की स्थापना राजा पांडू ने की थी । राजा पांडू के पांच पुत्र थे। जिन्हें पुरे विश्व में पांडवो के नाम से जाना जाता है।

ये गोविन्दघाट से 4 किलोमीटर दुरी पर स्थित है। और अन्य धार्मिक स्थलों से 24 किमी बद्रीनाथ से और 219 किमी केदारनाथ से दूर स्थित है। यहाँ भगवान् योग बदरी नारायण और भगवान वासुदेव के भव्य मंदिर बने हुए है।

ये दोनों मंदिर ही हिन्दुओ के प्रमुख धार्मिक स्थल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ये स्थानों भगवान् योग बदरी नारायण और वासुदेव जी का आवासक्षेत्र है। मंदिरों में सुबह और शाम को निश्चित समय पर आरती पूजा की जाती है। इन मंदिरों की समय सीमा काफी प्राचीन है।

हेमकुंड साहिब और लोकपाल मंदिर-Hemkund Sahib and Lokpal Temple

हेमकुंड साहिब और लोकपाल मंदिर सिक्खों का प्राचीन धार्मिक मंदिर है। इन मंदिरों का महत्व सिक्ख धर्म के लोगो के लिए बहुत खास है। हेमकुंड साहिब को सिक्खों का सबसे महत्त्वपूर्ण गुरुद्वारा भी माना जाता है।

हेमकुंड साहिब की ऊंचाई समुद्र तल से 4320 मीटर है। ये प्राचीन मंदिर है, ओर पर्यटक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। इसका पर्यावरण स्वर्ग के समान अद्वितीय है। यह मंदिर सिक्खों ओर हिंदुओं के अलावा अन्य धर्म के लोगो के लिए भी पूजनीय है।

हेमकुंड श्रद्धालुओं के लिए एक बहुत ही सुन्दर तीर्थ स्थल है। ओर पर्यटकों के लिए घूमने की बहुत अच्छी जगह है। इस स्थान पर स्थित हाथी पर्वत और सप्त ऋषि पर्वत दोनों मिलकर ग्लेशियर झील का निर्माण करते हैं। ग्लेशियर द्वारा एक एक छोटी सी जल धारा प्रवाहित होती है जिसे हिमगंगा नाम से जाना जाता है।

फूलो की घाटी-Valley of flowers

फूलो की घाटी प्रकृति द्वारा प्रदान किया हुआ हमे बहुत ही सुन्दर और अनोखा उपहार है। ये स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत अच्छी जगह है। पर्यटकों को ये स्थान बहुत भाता है। विज्ञानं के क्षेत्र पारिस्थितिकी , प्राणिविज्ञान और पक्षी विज्ञानं क्षेत्र में इसका विशेष महत्त्व है। फूलो की घाटी को वैली ऑफ फ्लावर्स सन 1937 में घोषित किया गया है।

इस घाटी को वैली ऑफ फ्लावर्स फ्रैंक-स्मिथ पर्वतारोही, एक्सप्लोरर और वनस्पतिशास्त्री द्वारा घोषित किया गया। फूलो की घाटी पर नवम्बर महीने से मई के महीने तक बर्फ की चादर जमी रहती है। इसलिए इन महीनो में इसका रास्ता बंद रहता है। फिर जून के महीने में बर्फ पिघल जाती है। तो पर्यटकों और यात्रिओ के लिए रास्ते वापस खोल दिए जाते है।

गोविन्दघाट-Govindghat

बद्रीनाथ क्षेत्र में देखने योग्य सबसे अच्छा स्थान गोविन्दघाट है। गोविन्दघाट फूलो की क्यारियों व फूलो की घाटी और हेमकुंड साहिब घुमने जाने के लिए सबसे प्रमुख और प्रथम केंद्र है।

गोविन्दघाट बद्रीनाथ और जोशिमल दोनों क्षेत्रो के मध्य बसा हुआ है। गोविन्दघाट पर पर्यटकों की सुविधा के लिए यहाँ की संस्था द्वारा होटलों की व्यवस्था की गई। अदि मंदिर के दरबार बंद हो तो यात्री यहाँ विश्राम कर सके।

जोशीमठ-Joshimath

जोशीमठ श्री आदिशंकर द्वारा बनाया गया था। ये मठ इनका प्रथम मठ था। बद्रीनाथ मंदिर से इस मठ की स्थापना 45 किलोमीटर दूर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आदि शंकराचार्य ने इस स्थान पर ज्ञान प्राप्त किया था। इन्होंने भाष्यम भी लिखा था।

औली-Auli

औली उत्तराखंड के हिमालय से प्रारम्भ होने वाला ढलननुमा भूमि की आकृति है। यहां भारत और विदेश से भी पर्यटक घूमने आते है। ओर स्कीइंग का लुप्त उठाते है। ये ढलान प्राकृतिक रूप से ही यहां बनी हुई है।

जोशीमठ बद्रीनाथ धाम से पर 16 किमी की दूरी है। औली से हिमालय की चोटियों नंदादेवी से 7817 मीटर दूर पर है। यहां का वातावरण बहुत ही रमणीय है।

बद्रीनाथ का भीमपुल-Bhimpul of Badrinath

भीमपुल ये एक प्रकृत द्वारा प्रदत्त पुल माना जाता है। ये प्राकृतिक पत्थरों द्वारा स्वत; निर्मित है। ये पुल बद्रीनाथ के पास बसे माणा गाँव स्थित है। भीमपुल बद्रीनाथ से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित है।

ये पुल सरस्वती नदी के ऊपर बना हुआ है। संतोपंथ झील और वसुन्धरा जलप्रपात का रास्ता इसी पुल के ऊपर से होकर निकलता है। ये बहुत कठोर और मजबूत पत्थरो से बना हुआ है।

आदिबद्री मंदिर-Adibadri Temple

आदिबद्री स्वामी नारायण जी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर की आकृति पिरामिड के समान गुबंद जैसी है। क्योंकि इसके ऊपर का भाग उबरा हुआ है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित की गई है। जो कि काले रंग पत्थर से निर्मित है।

इस मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने किया था। जो कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। कर्णप्रयाग से इसकी दूरी 17 किलोमीटर है।

बद्रीनाथ का रास्ता-Road to badrinath

 राष्ट्रीय राजमार्ग 6  {NH6] से बद्रीनाथ जुड़ा हुआ है।बद्रीनाथ जाने के रास्ते तीनो और से है ।  केदारनाथ के रास्ते भी बद्रीनाथ पहुंचा जा सकता है । जोशीमठ से बद्रीनाथ 40 किलोमीटर दुरी पर स्तिथ है।

राजमार्ग 6 जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ तक पहुँचता है। हरिद्वार होते हुए भी जा सकते है, और इस रास्ते पर विष्णुप्रयाग , अलकनंदा और धौलीगंगा नदियों का संगम होते हुए देखने को मिलता है ।

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