Nirjala Ekadashi 2021 : इन 5 शुभ मुहूर्तो में करें निर्जला एकादशी व्रत पूजा, इस नियम का जरूर करें पालन, जानें पूजा- विधि और शुभ मुहूर्त

Nirjala Ekadashi 2021: Perform Nirjala Ekadashi fasting in these 5 auspicious times, follow this rule, know worship method and auspicious time

Nirjala Ekadashi 2021: Perform Nirjala Ekadashi fasting in these 5 auspicious times, follow this rule, know worship method and auspicious time – www.worldcreativities.com

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है। सभी एकादशी में निर्जला एकादशी सबसे श्रेष्ठ होती है। निर्जला एकादशी व्रत को करने से 24 एकादशी व्रत के बराबर फल की प्राप्ति होती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। एक बार कृष्ण पक्ष में और एक बार शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं।

ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु को एकादशी तिथि प्रिय होती है। इस दिन विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना करनी चाहिए।

भगवान विष्णु की कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

निर्जला एकादशी व्रत में जल का सेवन नहीं किया जाता है। इस दिन जल का त्याग करें। व्रत का पारण करने के बाद ही जल का सेवन किया जाता है। 

एकादशी मुहूर्त

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ – जून 20, 2021 को 04:21 पी एम 
  • एकादशी तिथि समाप्त – जून 21, 2021 को 01:31 पी एम 
  • पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 22 जून को, 05:24 ए एम से 08:12 ए एम

इन शुभ मुहूर्तों में करें निर्जला एकादशी पूजा- 

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:04 ए एम से 04:44 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:51 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:43 पी एम से 03:39 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 07:08 पी एम से 07:32 पी एम
  • अमृत काल- 08:43 ए एम से 10:11 ए एम

निर्जला एकादशी पूजा- विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
  • भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
  • अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
  • भगवान की आरती करें। 
  • भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। 
  • इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। 
  • इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें। 

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Nirjala ekadashi 2021: पूरे साल की एकादशियों के फल की होती है प्राप्ति, जानिए निर्जला एकादशी की कथा

Nirjala Ekadashi 2021: The fruits of Ekadashi of the whole year are attained, know the story of Nirjala Ekadashi – www.worldcreativities.com

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार 21 जून 2021 दिन सोमवार को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत कठिन होता है। व्रत आरंभ होने के बाद अगले दिन पारण तक पानी पीना वर्जित माना जाता है। वैसे तो वर्ष की सभी एकादशी तिथि अपना अलग महत्व रखती हैं लेकिन निर्जला एकादशी का विशिष्ट महत्व माना गया है। इस व्रत को करने के सभी एकादशियों के फल की प्राप्त हो जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार निर्जला एकादशी का व्रत नियम और निष्ठा के साथ रखने से मनुष्य को जीवन में सुख और यश की प्राप्ति होती है एवं इस जन्म के बाद मोक्ष प्राप्त होता है। इस एकादशी को भीमसेन या पांडव एकदाशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का महातम्य स्वयं ऋषि वेदव्यास नें बताया है तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी की कथा।

पौराणिक कथा के अनुसार जब महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प करा रहे थे तब महाबली भीम ने निवेदन किया- महर्षि आपने तो प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता, मेरे पेट में ‘वृक’ नाम की जो अग्नि है, उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्यव्रत से वंचित रह जाऊंगा। आगे जानिए…

तब महर्षि वेदव्यास ने भीम की समस्या का निदान करते हुए और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि नहीं, कुंतीनंदन, धर्म की यही तो विशेषता है कि वह न केवल सबको धारण करता है बल्कि सभी के योग्य साधन व्रत-नियमों को भी बड़ी सहज और लचीली व्यवस्था में उपलब्ध करवाता है। अतः आप ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो। इससे तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों के फल की प्राप्ति होगी। निःसंदेह तुम इस लोक में सुख, यश और प्राप्त कर मोक्ष लाभ प्राप्त करोगे।

इस तरह से महर्षि वेदव्यास के आश्वासन पर वृकोदर भीमसेन भी इस एकादशी का विधिवत व्रत करने के लिए सहमत हो गए, इसलिए वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को लोक में पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो स्वयं निर्जल रहकर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को शुद्ध पानी से भरा हुआ घड़ा दान करता है। उसे जीवन में कभी भी किसी प्रकार की कमी नहीं होती। उसके जीवन में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Nirjala ekadashi 2021: सभी एकादशियों में सबसे कठोर और महत्वपूर्ण है ये एकादशी, पूजा विधि समेत ये है पूर्ण जानकारी

Nirjala ekadashi 2021: This Ekadashi is the most strict and important of all Ekadashi, this is complete information including worship method – www.worldcreativities.com

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्याहरवीं तिथि एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह से एक माह में दो और पूरे वर्ष में 24 एकादशी तिथि होती हैं। प्रत्येक एकादशी में भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन किया जाता है लेकिन सभी का अपना-अपना महत्व होता है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला यानी बिना पानी के व्रत किया जाता है। यह व्रत अत्यंत कठिन होने के साथ सभी एकादशियों में सबसे अधिक महात्म्य रखता है। इस बार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून दिन सोमवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत करने से वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे रखा जाता है एकादशी का व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि।

निर्जला एकादशी महत्व
निर्जला एकादशी को भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि वेदव्यास ने भीम को इस व्रत का महात्मय बताते हुए कहा था कि यदि तुम सभी एकादशी के व्रत नहीं कर सकते तो ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो, इससे तुम्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाएगा। तब वृकोदर भीम भी इस व्रत को करने के लिए सहमत हो गए इसलिए इस व्रत को पांडव एकादशी या फिर भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत करने से मनुष्य इस लोक में सुख और यश की प्राप्ति करता है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।

निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त-
प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को गंगा दशहरा पड़ता है और इसके अगले दिन निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। दशमी तिथि से ही एकादशी के नियम आरंभ हो जाते हैं। इस बार गंगा दशहरा 20 जून को मनाया जाएगा और इसके अगले दिन 21 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। 

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि आरंभ- 20 जून 2021 दिन सोमवार को शाम 04 बजकर 21 मिनट से 

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि समाप्त- 21 जून दिन मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 31 मिनट पर 

एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- 22 जून दिन बुधवार को सुबह 05 बजकर 24 मिनट से 08 बजकर 12 मिनट तक

एकादशी तिथि व्रत विधि-
दशमी तिथि को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही रात्रि में भूमि पर शयन करें।
एकादशी तिथि को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
इसके बाद पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नानादि करने के बाद व्रत का संकल्प करें।
यह दिन विष्णु जी का होता है इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ रहता है।
स्नान करने के पश्चात सर्वप्रथम सूर्य देव को जल अर्पित करें।
अब भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप जलाकर दिखाएं।
अब पीले पुष्प, फल, अक्षत, दूर्वा और चंदन आदि से भगवान विष्णु का पूजा करें। 
तुलसी विष्णु जी को अति प्रिया है इसलिए पूजन में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। 
भगवान विष्णु के समक्ष ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
इसके बाद एकादशी व्रत का महात्म्य पढ़ें और आरती करें।
पूरे दिन निर्जला उपवास करने और रात्रि में जागरण कर भजन कीर्तन करने का विधान है।
द्वादशी तिथि को प्रातः जल्दी घर की साफ-सफाई करें और स्नानादि करके भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद किसी जरुरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं शुभ मुहूर्त में स्वयं भी व्रत का पारण करें।

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